Anti-Paper Leak Bill: शिक्षा और पेपर लीक मामले पर रिफॉर्म बिल का विरोध क्यों कर रही है विपक्ष?
विपक्ष का केंद्र पर आरोप
विपक्ष ने बिल को लेकर सरकार पर कई संगीन आरोप लगाया कि-
- केंद्र सरकार इस कानून के बहाने राज्यों की शिक्षा व्यवस्था और राज्य स्तरीय परीक्षाओं पर अपनी पकड़ मजबूत कर करना चाहती है।
साथ ही NTA को असली समस्या बताते हुए प्रशासनिक नाकामी और भ्रष्टाचार कह दिया।
- विपक्ष ने मुख्य विरोध बिल को लेकर नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर था।
बिल में क्या प्रावधान था
- सबसे पहले प्रावधान था कि पेपर लीक करने वाले या नकल करने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल तक की सजा होगी।
- दूसरा प्रावधान था कि- व्यक्तिगत दोषियों को अधिकतम ₹50 लाख रूपयों का जुर्माना होगा।
- यदि कोई कोचिंग संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस या परीक्षा कराने वाली कंपनी शामिल होगी तो उसे 5 से 10 करोड़ का जुर्माना होगा, साथ ही ऐसी कंपनियों को 8 साल के लिए बैन कर दिया जाएगा।
- किसी भी पेपर लीक मामले की जांच शुरू होने के 2 महीने के भीतर उसे अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। सरकार इसके लिए 'स्पेशल टास्क फोर्स' (STF) भी बना सकती है।
- मामले को जल्द से जल्द निपटने के लिए हर राज्य में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे जिन्हें चार्जशीट दाखिल करने के 3 महीने के अंदर सुनवाई पूरा करना होगा।
यह विधेयक, जिसे कल (27 जुलाई को) पेश किया गया, दरअसल पहले से लागू Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में संशोधन है। यह कानून भी इसी सरकार द्वारा लाया गया था।
— BJP (@BJP4India) July 28, 2026
यह केवल एक कानून नहीं था, बल्कि आज़ाद भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला व्यापक कानून था, जिसका… pic.twitter.com/edG0oIxYVJ


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